प्रारम्भ में सार्वजनिक वितरण प्रणाली से सम्बन्धित निम्न समस्यायें आली के समक्ष चिन्हित होकर आयी

आली द्वारा अपने कार्यक्षेत्र में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के सुचारू क्रियान्वयन व लोगों में इस योजना तक पहुंच के लिये आली द्वारा उठाये गये कदम

आज़मगढ़ जिले में आली के कार्य के बाद सकारात्मक बदलाव

2010 से आज़मगढ़ जिले में आली के सामुदायिक पहल नामक कार्यक्रम के सक्रिय रूप से कार्य करने के बाद आज़मगढ़ के विभिन्न क्षेत्रो में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के वितरण व योजनाओं में कुछ सकारात्मक उपलब्धियां मिली जो इस प्रकार है:-

हिंसा मुक्त समाज की ओर एक सशक्त कदम रू हिंसा की चक्र तोडकर ज़ोया फातिमा (परिर्वतित नाम) अब दूसरो के लिए बनी प्रेरणा

45 वर्षीय ज़ोया फातिमा (परिर्वतित नाम) एक निम्न मध्यम वर्गीय मुस्लिम परिवार से है जिसका जन्म उत्तर प्रदेश के आज़मगढ जिले के मुबारकपुर गांव में हुआ था। पुरानी परम्पराओं का अनुसरण करने के कारण ज़ोया को बचपन से ही पर्दे में रहना पडा व 16 वर्ष की आयु ही उसका निकाह हो गया। निकाह में कुछ समय बाद ही ससुराल वालो द्वारा ज़ोया को बहुत मार पीट का सामना करना पडा जिसके कारण ज़ोया में डर और भय व्याप्त हो गया। इन सब परिस्थितियों में ही ज़ोया ने तीन बच्चो को जन्म दिया परन्तु उसके उपर हो रही हिंसा में किसी प्रकार की कोई कमी नही आई और इस हिंसा के चलते ज़ोया का उसके पति से अलगाव हो गया क्योकि ज़ोया ने कभी हिंसा के खिलाफ आवाज़ नही उठाई थी इसलिए असहाय होकर ज़ोया बच्चो को अपने साथ अपने मायके लाने के लिये भी आवाज़ नही उठा सकी और उसे अपने बच्चो से अलग होना पडा।

पित्रसत्तात्मक समाज की यह धारणा है कि महिलायें पुरूषों द्वारा प्राप्त सुरक्षा के दायरे में ही सुरक्षित हो सकती है अतः ज़ोया को आपने घर वालो के दबाव में पुनः विवाह करना पडा जिससे उन्होने दो सन्तानो को जन्म दिया परन्तु इस बार भी दुर्भाग्यवश ज़ोया को उसी प्रकार हिंसा का सामना करना पडा और उन्हे अपने पति का घर छोडना पडा और अपने मायके आ गई। मायके आने के 1 हफ्ते बाद ही ज़ोया पर ससुराल वापस जाने का दबाव बनाया जाने परन्तु इस बार ज़ोया ने अपने और अपनी संन्तानो के लिये आवाज़ उठाई और अपने दोनो बच्चो के साथ आज़मगढ़ के बिलेरियागंज नामक गांव में एक किराए के घर में रहने लगी।

इस दौरान ज़ोया आली की एक कार्यकर्ती अशुमाला के सम्पर्क में आई। आली एक विधिक पैरोकारी समूह है जिसकी मुख्य शाखा लखनऊ में है व सन् 1998 से आज़मगढ़ में सामुदायिक पहल कार्यक्रम के नाम से महिलाओं विशेषकर वंचित वर्ग की महिलाओं के साथ सक्रिय रूप से कार्य करती आ रही है।

आली के साथ सक्रिय रूप से कार्य करने के बाद ज़ोया अपने गांव में एक सशक्त नेत्रत्वकारी महिला के रूप में उभरी। आली के साथ इतने साल के कार्यानुभव के बाद ज़ोया में कई सकारात्मक बदलाव आए जैसे जो ज़ोया पहले किसी पुरूष से बात करने में संकोच करती थी अब वह अपने गांव में हो रही महिला हिंसा के विरूद्व आवाज़ उठाती है और जरूरत पडने पर पीडित महिला के साथ थाने में जाकर हिंसा के खिलाफ आवेदन देती है व एफ0आई0आर कराती है तथा निर्भय होकर सरकारी अधिकारीयों व पुलिस से बात करती है।

ज़ोया न सिर्फ महिला हिंसा के मुद्दो पर आवाज़ उठाती है बल्कि समुदाय की महिलाओं के जागरूक करने के लिये अलग अलग स्थानो पर जाकर बैठको का आयोजन करती है और सूचना का अधिकार, घरेलू हिंसा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली, समेंकित बाल विकास सेवा कार्यक्रम (आई.सी.डी.एस) आदी विषयों पर चर्चा के माध्यम से महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करती है।

ज़ोया आली के साथ जुडकर अपने जिले में सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी कार्य करती है तथा गांव के विभिन्न मोहल्लो के राशन कोटेदारों की कोटे की दुकान पर राशन वितरण के दिन निगरानी करती है यदि राशन कोटेदार सरकार द्वारा निश्चित मूल्य व मात्रा पर राशन न देने पर अन्य महिलाओं को एकत्रित कर उसकी विभाग में शिकायत करती है।

आपने कार्य के दौरान ज़ोया ने शिक्षा के अभाव का अनुभव किया तथा वर्ष 2013 में शिक्षा के 19 वर्ष के अन्तराल के बाद ज़ोया ने फिर से 10 कक्षा में प्रवेश लिया। ज़ोया आली के सम्पर्क में आने से पहले अपने जिले (आज़मगढ़) से बाहर भी नही गई थी परन्तु वर्तमान समय में उन्होने दिल्ली में जागोरी संस्था के द्वारा आयोजित किये गए 4 दिवसीय प्रशिक्षण में प्रतिभाग किया तथा जरूरत पडने पर लखनऊ स्थित आली के दफ्तर में भी आने लगी।

ज़ोया में आए यह सकारात्मक बदलाव समुदाय की प्रत्येक महिला के लिए एक उदाहरण है। ज़ोया अब ना सिर्फ खुद हिंसा के चक्र से बाहर निकल एक आत्मनिर्भर और सशक्त जीवन जी रही है बल्कि अपने समुदाय की अन्य महिलाओं को भी अपने हक और अधिकारो के प्रति जागरूक कर हिंसा मुक्त समात बनाने में अपना सक्रिय योगदान निभा रही है।

प्रगति रिर्पोट रू समुदायिक पहल कार्यक्रम, सार्वजनिक वितरण प्रणाली आज़मगढ रू जनवरी 2010 – मई 2014 तक आज़मगढ जिले में अपने कार्य के दौरान आली के समक्ष पुलिस द्वारा गैर कानूनी हिरासत के अलावा भी अन्य कई मुद्दे व समस्यायें चिन्हित होकर सामने आयी जिसमें से मुख्य समस्या वंचित वर्ग व गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने वाले लोगो को सरकारी योजनाओं का लाभ न मिलना था। जिसमें से एक प्रमुख समस्या सार्वजनिक वितरण प्रणाली से सम्बंधित थी। आज़मगढ में ज्यादातर परिवारो का जीवनयापन सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पी0डी0एस0) के द्वारा ही होता था परन्तु जिले में राशन का वितरण असामान्य व निरन्तर न होने के साथ साथ निर्धारित मूल्यो व मात्रा के अनुसार भी नही होता था जो आज़मगढ़ में महिलाओं की एक मुख्य समस्या थी अतः आली ने आज़मगढ़ में अपने सामुदायिक पहल कार्यक्रम के दौरान सार्वजनिक वितरण प्रणाली को एक मुद्दे व समस्या के रूप में चिन्हित कर कार्य करने का निर्णय किया।